चाहे कुछ हो जाये लोग नही समझेंगे कि आस्था मन से होती है ,शोर से नहीं ,दिखावे से नहीं
अभी हरिद्वार में कावर यात्रा चल रहा है ,हरिद्वार से जल लेकर जाने वाले कावरियों को देखकर नहीं लगता कि डेढ़ महीने पहले कितना बड़ा विध्वंस हुआ कितने लोग मरे ,और कितनो कि जिंदगी जीने के लिए अब कुछ भी नहीं बचा
गाजा बाजा ,डीजे ,नाच ,अंग्रेजी गीत ,साज सज्जा आवाज इतना कि अगर किसी मृत आदमी को भी सडक पर ला खङा किया जाये तो उसका भी दिल धड़कने लगे | जहाँ इन्होने विश्राम किया सारा गन्दगी पोलिथिन फैलाते चले गए ,सडको पर पानी के ग्लास फेकते जा रहे है |केले कि छिलके जहा खोजिये वही मिलेगा ,और कहते है हम पूजा करते है | उर्जा और पैसो का ऐसा बेहूदा प्रयोग देखकर आपको अपने और इन लोगो पर निश्चय ही रोना आ जायेगा |आपको अपने पर इसलिए कि आप इन्हें समझा न सके और ये कि कभी समझ न सके |
शायद जो पैसे धुआँ में उड़ रहे है ,जो पैसे आवाज बनकर लोगों को बहरा बना रहे है ,जो शक्ति यूँही लोग दौड़ कर नष्ट कर रहें है, उनकी जरुरत उत्तराखंड को है ,यहाँ के लोगों को है ,पैसो कि जरुरत यहाँ के पेङो को है ,उस शक्ति कि जरुरत यहाँ के पहाड़ों को है | पैसो कि जरुरत गंगा को है ,उन पैसो कि जरुरत उन संस्थाओ को है जो इन पहाड़ों पर सड़क बनाने पर अनुसन्धान करते है |पैसो कि जरुरत उनको है जो उड़न खटोला बनाकर लोगों को बचाते हैं |और पैसो कि जरुरत यहाँ के संस्थाओ को है जो बच्चो को जज्बाती बनाते है ,वैज्ञानिक बनाते है ,|
मै तो भगवन से नहीं मिला लेकिन मान्यताओ से तो साफ प्रतीत होता है कि भगवान को प्रदुषण से नफरत है ,चाहे कोई भगवन क्यों ना हो ||
अभी हरिद्वार में कावर यात्रा चल रहा है ,हरिद्वार से जल लेकर जाने वाले कावरियों को देखकर नहीं लगता कि डेढ़ महीने पहले कितना बड़ा विध्वंस हुआ कितने लोग मरे ,और कितनो कि जिंदगी जीने के लिए अब कुछ भी नहीं बचा
गाजा बाजा ,डीजे ,नाच ,अंग्रेजी गीत ,साज सज्जा आवाज इतना कि अगर किसी मृत आदमी को भी सडक पर ला खङा किया जाये तो उसका भी दिल धड़कने लगे | जहाँ इन्होने विश्राम किया सारा गन्दगी पोलिथिन फैलाते चले गए ,सडको पर पानी के ग्लास फेकते जा रहे है |केले कि छिलके जहा खोजिये वही मिलेगा ,और कहते है हम पूजा करते है | उर्जा और पैसो का ऐसा बेहूदा प्रयोग देखकर आपको अपने और इन लोगो पर निश्चय ही रोना आ जायेगा |आपको अपने पर इसलिए कि आप इन्हें समझा न सके और ये कि कभी समझ न सके |
शायद जो पैसे धुआँ में उड़ रहे है ,जो पैसे आवाज बनकर लोगों को बहरा बना रहे है ,जो शक्ति यूँही लोग दौड़ कर नष्ट कर रहें है, उनकी जरुरत उत्तराखंड को है ,यहाँ के लोगों को है ,पैसो कि जरुरत यहाँ के पेङो को है ,उस शक्ति कि जरुरत यहाँ के पहाड़ों को है | पैसो कि जरुरत गंगा को है ,उन पैसो कि जरुरत उन संस्थाओ को है जो इन पहाड़ों पर सड़क बनाने पर अनुसन्धान करते है |पैसो कि जरुरत उनको है जो उड़न खटोला बनाकर लोगों को बचाते हैं |और पैसो कि जरुरत यहाँ के संस्थाओ को है जो बच्चो को जज्बाती बनाते है ,वैज्ञानिक बनाते है ,|
मै तो भगवन से नहीं मिला लेकिन मान्यताओ से तो साफ प्रतीत होता है कि भगवान को प्रदुषण से नफरत है ,चाहे कोई भगवन क्यों ना हो ||


