Wednesday, 14 August 2019

ये तर्क की हार है ।

            मोदी के जितने के बाद हर जगह जीत की बात हो रही है ।।चाणक्य  नीति की बात हो रही है ।पर एक जो बात नही हो रही वो है तर्क । यह  तर्क कि हार है | जब लोग भावनाओं पे वोट देतें है ,फिर सरकारे काम नहीं करती |
                                    आखिर क्यों करे जब यूँ ही वोट दे रहे ,जब यूँ ही नारे लगा रहे ,जब यूँ ही खुश हो रहे ||
शायद यह भारत के  समस्यायों को ख़त्म नहीं करेगा बल्कि और बढ़ाएगा | क्यों बेरोजगारी मुद्दा नहीं बन पाया ,क्यों गरीबी मुद्दा नहीं बना ,क्यों  हवा ,पानी कभी मुद्दा नहीं पाता जबकि आधे से ज्यादा लोग हानिकारक हवा और पानी लेने को मजबूर है | बेरोजगारी तेतालीस साल में सबसे उच्च स्तर पे है | फिर भी बेरोजगारी कोई मुददा नहीं बना ,यह यहाँ कि जनता कि हार है कि वो अपने मुद्दे नहीं बना पाए | अर्थव्यवस्था कि हालत खस्ता है ,बहुत सारे छोटे बड़े कारखाने बंद हुए | सब जगह निजीकरण कि होड़ है ,जैसे निजीकरण कोई जादू कि छड़ी है जिससे सारे समस्याओं का हल हो जायेगा | सरकारी सम्पति को  कौड़ियों के दाम बेचना बहुत सारी बातें है जिसको मुद्दा बनना चाहिए था पर मुद्दा नहीं बन पाया |
 इससे किसी पार्टी को कोई नुकसान नहीं होने वाला ,नुकसान यहाँ कि औसत जनता को है |धनी जनता के पास सब कुछ है उसको कोई फर्क नहीं पड़ता कि बेरोजगारी दर बढे या घटे ,घाटा गरीब को है ,औसत लोगों को है ,जो न धनी है न गरीब |
         यह किसी पार्टी कि गलती नहीं कि लोग इस मुद्दों को तवज्जो नहीं देते | यह उन लोगों कि गलती है जिनको ये पता नहीं कि वो क्या  कर रहे है | सोच कि कमी है ,पढाई कि कमी है | सभी आज कल व्हात्त्सप्प यूनिवर्सिटी से डिग्री ले रहे |
               मीडिया का सरकारी कीर्तन भजन ,शाम का चीखो बाला बहस लोगों को सोचने से दूर ले जाकर अंधापन का भांग पिला रहा है और शायद इसलिए लोग गन्दा हवा पानी पीकर भी खुश है और अपने अभिमान को बढ़ा रहे है |राष्ट्रवाद और धर्म का भांग इतना प्रभावी है कि असली वाला  भांग हाथ जोड़ ले  |
                     मनुष्य काफी अभिमानी प्राणी है ,जब किसी चीज को अभिमान से जोड़ दिया जाये तो फिर जीवन अभिमान से बौनी हो जाती है ,यह झूठा अभिमान खतरनाक और  जीवन को बौना बनाने वाला होता है | अब समस्या अभिमान के सामने बौनी हो रही है  फिर समस्यायों को कौन देखे ,किसको इतनी फुर्सत है कि वो हवा पर सोचे ,शिक्षा के बारे में सोचे ,पानी के बारे सोचे ,खाने के बारे में सोचे  | सबको अपने धर्मे का सर्वश्रेष बनना है | बेरोजगार है पर  सोशल मिडिया पर धर्म के लिए जहरीले पोस्ट किये जा रहे |
यह आँखों पर पट्टी है  जिसे मिडिया ने बांधा है  और  ज्यादातर जनता इसके चपेट में है  | कैसे हटेगी वो तो पता नहीं पर जब हटेगी तब तक बहुत देर हो चुकी होगी |

Monday, 12 August 2019

आखिर क्यों भारतीय राजनीति में तेज तरार्र युवा नेता न के बराबर है |

                       अगर हम देश कि राजनीति को देखे समझदार युवा नेता न के बराबर मिलेगा | जो पढ़ा लिखा हो और सोचने कि हिम्मत रखता हो ,जो पार्टी  को  चलाने  का जज्बा रखता हो , जो हल्ला नहीं करता हो और कुछ काम करता हो |
जितने भी युवा नेता  है वो चाँदी का चम्मच  लेकर पैदा हुए है ,जिनका अपना राजनितिक खानदान है ,वे सिर्फ विरासत को  सम्भाल रहें है |इन युवा नेता कि सोच पुरातन है ,बाकि हल्ला नया है ,फैशन नया है , बाकी सब पुराना है ||
ये सोचने कि बात है कि जिस देश में आधे से ज्यादा लोग युवा हो बच्चे हो वहां  जमीन से निकला कोई युवा नेता क्यों नहीं | वैसे तो अब जमीन  से निकले नेताओ का घोर अभाव है | यह सोचने कि बात है |
जहाँ नेता वही बनता है जिसके पास पैसा हो वहां नए लोगों का आना बहुत मुस्किल बन गया है |
आज के युवा नेता है वो कल तक रोड पर घूम रहे थे ,सोशल मीडिया के आते ही वो नेता बन गए , पहले ट्विटर पर गाली देने का काम करने लगे और उनको लगने लगा कि वो देश बना रहे है |
भारतीय राजनीति कि दयनीय स्थिति कि एक वजह इसमें प्रतिभावान  युवाओं का न होना है |

अगर इतिहास को गौर से देखा जाये तो आजादी के समय ,राजनीति प्रतिवाभावान लोगों से भरा पड़ा था ,जिनमे नेतृत्व का , साहस  का भंडार था ,सभी पढ़े लिखे लोग थे | उस समय  कानून कि पढाई का क्रेज था और सारे प्रतिभावान बच्चे कानून कि पढाई करते थे ,इसलिए स्वंत्रता संग्राम में प्रतिभावान लोगों कि कोई कमी नहीं थी |
आज  ऐसा नहीं है ,प्रतिभा तो कहीं और है ,वो बैंगलोर ,दिल्ली ,और विदेशो में किसी कंपनी के लिए मजदूरी कर रहे है | पैसा का ऐसा प्रभाव बढ़ा है कि  सभी प्रतिभावान बच्चे सिर्फ पैसा कमाना चाहते है भले देश गटर में जाये ||
राजनितिक पार्टियों कि भी  मज़बूरी है वो उनको आकर्षित नहीं कर पा रहे| यह एक पार्टी कि समस्या नहीं है यह सब पार्टियों में है | जो कानून बना रहे है ,या जो पार्टियों के शीर्ष पर है उनको सोचना चाहिए | जो हारते है वो सोचते है पर कुछ करते नहीं  है ,बाकि जो जीतते है  वे करने कि जरुरत नहीं समझते |
प्रतिभावों को राजनीति में लाना अब के राजनेताओं  का मुख्य काम होना चाहिए |
शायद कांग्रेस को होश आयें और  कुछ करे
क्योंकि  जिसने चाँदी का चम्मच से खाया है वो धुप में नहीं घूम सकता ,देश कि समस्याओं को महसूस नहीं कर सकता |
युवा नेता के नाम पे नेता पुत्रो  का गुणगान देश और समाज के लिए काफी खतरनाक है और इससे राजशाही कि बू आती है ,एक गणतंत्र में राजशाही कि बू ठीक नहीं , यह उर्जावान युवायों  में  निराशा  लेकर आ रही है |
जो देश समाज के लिए ठीक नहीं ||

Sunday, 11 August 2019

जीवन


एक अँधेरा लाख सितारे |
एक निराशा लाख सहारे  ||

सबसे बड़ी सौगात है जीवन |
नादाँ है जो जीवन से हारे ||

दुनिया कि ये बगिया ऐसी
जीतने कांटे फुल भी उतने ||
दामन में खुद आ जायेंगे
जिनकी तरफ तू हाथ पसारे ||

एक अँधेरा लाख सितारे |
एक निराशा लाख सहारे  ||

बीते हुए कल कि खातिर तू
आने वाला कल मत खोना |
जाने कौन कहाँ से  आकर
राहे तेरी फिर से सवाँरे ||

एक अँधेरा लाख सितारे |
एक निराशा लाख सहारा ||

दुःख से अगर पहचान न हो
तो कैसा सुख और कैसी खुशिया ||
तुफानो से लड़कर ही तो
लगते है साहिल इतने प्यारे ||


एक अँधेरा लाख सितारे |
एक निराशा लाख सहारे  ||

सबसे बड़ी सौगात है जीवन |
नादाँ है जो जीवन से हारे ||



#गीत
#आखिर क्यों  (1985)
#मोहम्मद अजीज
#इन्दीवर

The first Ray

Being simple is beauty
Being regular is Beauty like The first Ray

What is beauty

Being Organised is Beauty 

#photography
#Bangalore



STONES

                           पत्थर मारने के लिए नहीं
                              बल्कि सुन्दर होतें है  ||



Saturday, 25 May 2019

Thursday, 23 May 2019

जो खेलता है वही जीतता है

जो खेलता है ,
वही  हारता है |
जो खेलतें है
वही जीतते है |
हारने से खेलना नहीं  छोड़ते |
हारने से लड़ना नहीं छोड़ते ||
जो खेलता है
वही जीतता है |
डरने वाले जीतते  नहीं
डरने वाले लड़ते नहीं ||

Saturday, 11 May 2019

जीवन क्या है ..

जीवन क्या है

जीवन संघर्ष है
कभी रुकना है
फिर चलना है |
कभी सुस्ताना
कभी तेजी से दौड़ना
कभी रेंगना
कभी सरपट भागना
ही तो जीवन है ||

कुछ पाना है
कुछ देना है ||

जीवन क्या है

जीवन यही है
अपना वजूद ही जीवन है |
आत्मविश्वास ही जीवन है |
प्रफुल्लित होकर ही जीना
जीवन है ||

कभी हवा से बाते करना
कभी खुद हवा बन जाना
ही जीवन है ||

जीवन समय नहीं हर एक  पल है ||



सबसे खतरनाक होता है ||हमारे सपनों का मर जाना ||

सबसे खतरनाक होता है
मुर्दा शांति से भर जाना
तड़प का न होना सब सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौटकर घर जाना
सबसे खतरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना

---पाश

कपट के शोर में
सही होते हुए भी दब जाना, बुरा तो है
जुगनुओं की लौ में पढ़ना, बुरा तो है
मुट्ठियां भींचकर बस वक्त निकाल लेना, बुरा तो है
सबसे खतरनाक नहीं होता

सबसे खतरनाक होता है
मुर्दा शांति से भर जाना
तड़प का न होना सब सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौटकर घर जाना
सबसे खतरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना
--पाश

Sunday, 7 April 2019

Idea of Power

The idea of having a so-called strong leader and weak institutions is not good for the inductive and strong nation. The weakening of Election commission and other constitutional bodies is like cancer for the administration of India, it will not only weaken India but also kill a lot of dreams that are living in the villages, The weakening of the institution is not good for the normal people. Though fool people fall in the trap of strong leader concept.
we as people of a democratic country does not need strong leaders that take the decision without thinking anything but the strong institutions that protect the right of people and fulfil people aspirations. 
India is a country of dreams, country of aspiration, dreams are in villages and small town .dream for education, dream for having Hospital in a village. dream to the zenith of the sky.
These dreams cannot be filled by a strong leader in this vast country nut the only institution can.  we need Leader, not King, we need representatives that say about their constituencies without their own personal benefit and loss. The leaders' so called strong leader who weakens the institution are non-performing and greedy leaders that want to capture power by weakening institutions and by doing wrong things. 
the weakening of Institution is weakening of dream of common people. Dream of a village Boy. Dream of a small town dream of Justice.

The Election is coming, so Vote Accordingly

Wednesday, 20 February 2019

Think out of the box

Nowadays media and social media is making a box of hatred violence and revenge. and I just say
"think  out of the box "
why some people political party is doing this is no longer a secret. it's well known and obvious now, it is for the vote because the elections are coming.
opinion manipulation, propaganda and fake news are on their way for manipulating our view, our opinion,  our and we have to be little cautious. 
think out of the frame. 
think why this is so.
think why opinion manipulation is there.
is this democracy.
no na. 
check facts.
make your own opinion
don't be a pray of hatred.
don't be a pray of propaganda.
believe in yourself.
use your mind.
think accordingly.
and 
don't read history in social media university.
read history in real books not facebook.
we only can save us from propaganda, hatred, and violence
stay cool, stay happy 

THINK OUT OF THE BOX
don't be a pray of HOAX









 



Friday, 18 March 2016

मैं तुफानो में चलने का आदी हूं.....

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

हैं फ़ूल रोकते, काटें मुझे चलाते..
मरुस्थल, पहाड चलने की चाह बढाते..
सच कहता हूं जब मुश्किलें ना होती हैं..
मेरे पग तब चलने मे भी शर्माते..
मेरे संग चलने लगें हवायें जिससे..
तुम पथ के कण-कण को तूफ़ान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

अंगार अधर पे धर मैं मुस्काया हूं..
मैं मर्घट से ज़िन्दगी बुला के लाया हूं..
हूं आंख-मिचौनी खेल चला किस्मत से..
सौ बार म्रत्यु के गले चूम आया हूं..
है नहीं स्वीकार दया अपनी भी..
तुम मत मुझपर कोई एह्सान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

शर्म के जल से राह सदा सिंचती है..
गती की मशाल आंधी मैं ही हंसती है..
शोलो से ही श्रिंगार पथिक का होता है..
मंजिल की मांग लहू से ही सजती है..
पग में गती आती है, छाले छिलने से..
तुम पग-पग पर जलती चट्टान धरो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

फूलों से जग आसान नहीं होता है..
रुकने से पग गतीवान नहीं होता है..
अवरोध नहीं तो संभव नहीं प्रगती भी..
है नाश जहां निर्मम वहीं होता है..
मैं बसा सुकून नव-स्वर्ग “धरा” पर जिससे..
तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

मैं पन्थी तूफ़ानों मे राह बनाता..
मेरा दुनिया से केवल इतना नाता..
वेह मुझे रोकती है अवरोध बिछाकर..
मैं ठोकर उसे लगाकर बढ्ता जाता..
मैं ठुकरा सकूं तुम्हें भी हंसकर जिससे..
तुम मेरा मन-मानस पाशाण करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

गोपालदास नीरज(रचनाकार)

#संकलित 

Friday, 15 May 2015

जिंदगी का सफर

जिंदगी का सफर एक अनजाना सफर है जिसमे कोई अपने भविष्य के बारे में नहीं जानता | जिंदगी एक पहेली की तरह भी है ,जिंदगी सवाल की तरह भी है ,यह खुशी भी है ,इसमें गम भी है ,अपने  आप को समझना बड़ा मुश्किल है ,लेकिन इसी में सभी जीते है  और  खुश  भी रहते है  ||




जिदगी का सफर
है ये कैसा सफर |

कोई समझा नहीं
कोई जाना नहीं ||

है ये कैसी डगर
चलते है सब मगर |

कोई समझा नहीं

कोई जाना नहीं ||

#किशोर कुमार गीत 

Thursday, 14 May 2015

अब फिर एक स्वदेशी आन्दोलन की जरुरत है .......

अब फिर  एक स्वदेशी आन्दोलन की जरुरत है ,हम सिर्फ खरीदतें है बेचते नहीं जिससे अपना खजाना खाली रहता है ,और हम  दूसरों पर आश्रित रहते है हमें मन  ही मन  प्रण करना चाहिए की जितना हो सके स्वदेशी सामान का प्रयोग करेंगे ,ताकि दूसरे देश से सामान खरीदने की जरुरत न पड़े |सरकार में बैठे लोगों को इसके बारे में  सोचना चाहिए |जनता सोचती है सरकार नहीं कुछ कर रही ,सरकार सोचती है की मुश्किल हालत है कैसे होगा ,सब जब साथ चलेंगे हाथ में हाथ डालकर तभी कुछ होगा सभी को स्वदेशी होना होगा देशभक्त बनना पड़ेगा |
      हम सभी कोको कोला का काला  पानी पीते है और बिदेशी को पैसा पहुचातें है हमें प्राण करना चाहिए की कोको कोला का काला पानी नहीं पियेंगे जिससे न  सिर्फ पैसा विदेश भेजते है बल्कि अपना सेहत भी खराब करते है  |कोका कोला के काला पानी की जगह आप दूध पीजिए वो भी अमूल का ,चाहे लस्सी पीजिए और मस्त हो जाइये |
       हमने बचपन में खिलौनों से खेला है लेकिन तब मिट्टी के खिलौने होते थे न कोई प्रदुषण ना  कोई खतरा ,अब चीन से बने खिलौनों से बाजार पटा पड़ा है वो कभी कभी हानिकारक भी होते है पर हम खरीद के लाते है क्योंकि वो सस्ते होते है |आप ही सोचिये इतना सस्ता बेचकर  भी चीनी फायदा भी कमा लेतें है यानि जरुर कही वो घटिया क्वालिटी का सामान हमें देते है |
       हमारे देश में अब शिक्षा व्यवस्था को ठीक करने की जल्द जरुरत है ताकि यहाँ के पढ़े विद्यार्थी यही पर कुछ करें और भारत को एक बढ़िया स जगह बनाये रहने के लिए जीने के लिए ,यहाँ के लोगों का जीवन सुधरे |
      हमें अपने तकनिकी ज्ञान को तगड़ा करना होगा ताकि हमें किसी से तकनीक नहीं खरीदना पड़े ,देश के अच्छे संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चो को भी देशभक्त बनना होगा और देश में रहना होगा ,पैसे के पीछे भागना बंद करना होगा ,विदेश जाना बंद करना होगा | 
    आशा है की हम फिर से स्वदेशी आन्दोलन शुरू करेंगे ||
                                  स्वदेशी खायेंगे 
                                 स्वदेशी पियेंगे और
                                   स्वदेशी चीजों का उपयोग करेंगे ||
    


भाई ये तो धोखा हो रहा है .....

भारत के महामहिम प्रधानमंत्री जी चाइना पहुचे ,की विजेनस की बात करेंगे कुछ विकास की बात करेंगे तब तक वहाँ के सरकारी चैनल ने भारत का मानचित्र दिखा दिया जिसमे  न तो जम्मू और कश्मीर था और न ही अरुणाचल प्रदेश | चाइना  का चिन्ह तो ड्रगन  है ,असल में इसे गिरगिट होना चाहिए पल पल रंग बदलता है ,कभी दोस्ती की बात करता है कभी व्यापार की तो कभी भारत के मानचित्र से भारत के अंग को काटकर खुद में मिला लेता है ,और थोरा बहुत पाकिस्तान को  दे देता है |कहते है ना  की चोर चोर मौसेरे भाई  ,सेम बात यहाँ भी लागू होता है ,पाकिस्तान और चाइना की बहुत दोस्ती हो गया है ,अब दोनों मौसेरे भाई हो गये है | अब देखने की बारी भारत के लोगों की है की हमारे प्रधानमन्त्री महोदय क्या क्या कर के आते है |
          असली समस्या ये है की क्या समझोता होगा ये तो पता चलता नहीं है क्योकि कुछ बात गोपनीय रख लेते है ताकि अपनी नाकामयाबी और निष्कर्मता को छिपाया जा सके जैसा की शिमला समझौते में हुआ था |
भारत एक गणतंत्र है ,जनतंत्र है यहाँ  के लोगों को इन समझौतों के बारें में जरुर जानकारी देनी चाहिए क्योकि जाने अनजाने ऐ समझौते यहाँ के लोगों के जीवन को बहुत प्रभावित करते है |
               भारत और चीन का व्यापार  भी संतुलित नहीं है ,भारत के लोग सिर्फ खरीददार है और चीन वाले दुकानदार ,सारे इलेक्ट्रोनिक के सामान चाइना से बन के आतें है और भी बहुत सी चीजे वहाँ से बन के आती है जिसमे खिलोनों से लेकर बड़े मशीनरी तक है जबकि भारत केवल कच्चे माल चीन को बेचता है |ऐसी  सम्बन्ध से तो न  सम्बन्ध ही अच्छा है कमसे कम भारत में कच्चा माल तो  रहेगा ,जब चाहे भारतीय उसे उपयोग करेंगे |असल में चीन के माल को भारत में बेचने की इजाजत होनी ही नहीं चाहिए ,चीनी सामान न सिर्फ घटिया क्वालिटी के होते है बल्कि कभी कभी हानिकारक भी होतें है जैसे चाइना के बने बलून्स और खिलौने |
       अब देखना ये है की हमारे मोदी जी इनसे कैसे पेश आते है | समस्याय खतम होती है की और बढ़ जाती है ,फिलहाल मुझे चीन के नियत में खोट लगता है |

Wednesday, 13 May 2015

बस यूँ ही ...............

भारत में  जितने भी प्राइवेट कॉलेज है उनमे  अधिकतर कॉलेज का  एक ही लक्ष्य है ,पैसा कमाना  चाहे वो जैसे भी हो ,पढाई एक मजाक बन गया है | पैसे के खातिर वो बच्चो से तरह तरह के फी जमा करवाते है और पढाई लिखाई कुछ नहीं |अधिकतर बच्चो के पास बी टेक करने के बाद भी न  जॉब होता है  न  ही उन्हें एम टेक में एडमिशन मिलता है | और कोचिंग वालों की चांदी हो जाती है ,बच्चे  बी टेक करने के बाद कोचिंग करते है | कोचिंग भी पूरा लुट ,एक बैच में चार सौ से पांच सौ बच्चे बैठते है |सरकारी जॉब पाना बड़ा ही कठिन है  | कहते है न की डरे हुए से लूटना आसान होता है वही काम कोचिंग वालें करते है |
      अब सवाल उठता है की ऐसी सडी हुई शिक्षा व्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन है और क्यों इसे बदला नहीं जा रहा |कुछ राज्यों में शिक्षा व्यवस्था इतनी खराब है की आप सोच भी नहीं सकते ,खासकर उच्च शिक्षा का हाल  खस्ता  है |
                    मुझे ऐसा लगता है की हमारे यहाँ चुनाव में कोई शिक्षा के लिए कोई वोट नहीं मांगता क्योकि अभी जनता पढाई लिखाई के महत्व को नहीं जानती ,अगर जानती भी है उनकी संख्या कुछ थोड़ा  है | शिक्षा का महत्व जब  हार आदमी जन जायेगा तब शिक्षा को बढ़ाना आसान हो जायेगा ,और उसकी गुणवत्ता में बदलाव आयेगा
                    भारत में गरीबी है ,गरीबों की संख्या ज्यादा है  चुनाव  उनके लिए भोजन की व्यवस्था और  उनसे सम्बंधित मुद्दों पर होता है ,पर असली मुद्दा कही खो जाता है वह है शिक्षा |असल में यहाँ  की प्रशासन और नेतृत्व ही  हमेशा शिक्षा को हासिये पर रखा है |
  हमारे देश में चुनाव जात  ध्रुवीकरण से होता है |विद्यालय को बनाने के लिए जगह नहीं मिलती लेकिन अल्पसंख्यक  हॉस्टल के लिए जगह मिल जाती है |  आप ही बताए की स्कूल में अल्पसंख्यक के बच्चे नहीं पढते क्या .|  जब तक जात ,धर्म की राजनीती होगी तब तक कुछ नहीं होगा दंगे के सिवा
              इस समय   एक नेतृत्व की जरुरत है एक दृष्टी की जरुरत है ,एक दृढ प्रतिज्ञ आदमी की जरुरत है जो  इस व्यवस्था को बदलने के लिए हिम्मत और जज्बा रखता हो  जब प्राथमिक शिक्षा ही   नहीं होगी  फिर उच्च शिक्षा कैसे सफल हो सकती है |
          

Tuesday, 12 May 2015

शुक्रिया................

कॉलेज के चार साल एक अच्छा खासा समय होता है जिसमे कोई अपना व्यक्तित्व बदल सकता है वह दब्बू से दबंग बन सकता है  ,मस्ती कर सकता है ,पढाई कर सकता है ,दोस्ती कर सकता है ,बहुत कुछ कर सकता है,अपने शौक को एक नया रूप दे सकता है ,अपने  भविष्य को बना सकता है  और बिगड भी सकता है | कहते है न की जब एक बार समय निकल जाता है तो दुबारा नहीं आता उसी तरह ऐ समय बड़ा ही महत्वपूर्ण था ,आदमी को अगर यह पता लग जाए की वह क्या कर रहा है और इसका क्या असर होगा तो वह समय को समझ लेगा और सफल होगा | हम कब खुश  होते है जब हम सफल होतें है ,और शायद असफल होने पर निराश  और दुखी  
                 पता नहीं मैंने अपना समय बर्बाद किया की उपयोग किया ,सिखा  की नहीं  सिखा  की इससे भी ज्यादा सीख सकता था  ,लेकिन इतना तो जरुर है की ऐ समय बड़ा महत्वपूर्ण था  |
                 मै चार साल  एक छोटे से कॉलेज में पढाई की , न जाने कितने लोगों से मिला सेनिअर  जूनीयर साथ वाले न जाने कितने कुछ तो दिल में बस गये बाकी आये मिले और चले गये ,दुनियादारी सीखी ,अकेले रहना सिखा  बहुत कुछ सिखा मैंने कॉलेज में आकर | मै  हर उस सख्स का सुक्रिया अदा करना चाहता हू जिससे मै मिला  ,जिससे कुछ सिखा  , वो  सेनिओर्स जो मेरा हौसला अफजाई करते थे .एक अच्छा इंसान मानते थे | साथ वाले दोस्त जो हमेशा मुझे बहुत ही सहयोग दिया ,और कुछ जूनीयर का जिन्होंने मुझे जरुरत से ज्यादा आदर और प्यार दिया ,  बहुत  बहुत सुक्रिया  |
      आदमी एक सामाजिक प्राणी है अकेले नहीं रह सकता | अपनी बातों को बताने के लिए  ,कुछ जानने के लिए समाज में आदमी रहता है ,कुछ  दोस्त बनते है ,कुछ लोग बड़े करीब हो जाते है कुछ दूर रहकर भी करीब रहते है ,हर वो सख्स   जिसने  एक पल भी  मेरे खातिर दिया  उसको तहे दिल से सुक्रिया  ,धन्यवाद .... सुक्रिया  
             

की बच्चा बन जाऊ

मेरी ख्वाहिश है कि मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊं
मां से इस तरह लिपट जाऊं कि बच्चा हो जाऊं।

लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक मां है जो मुझसे खफा नहीं होती। 

Monday, 11 May 2015

माँ तुमको माँ दिवस मुबारक हो .......


जब मै छोटा था तब मुझे  ये माँ दिवस कभी पता नहीं चला अब जब मै तुमसे दूर रहता हू ,तब यह  बहुत मनाने का मन करता है ,मन करता है की मै एक दिन तुम्हारे लिए खाना बनाऊ ,क्योकि तुम तो मेरे लिए  इतने दिनों से  खाना बनाया है ,एक दिन भी मैंने नहीं बनाया |आज फिर तुम्हारी  उँगलियों को पकड़कर चलने का मन कर रहा है ,लेकिन मै तो अब बड़ा हो गया  पता नहीं माँ मै क्यों बड़ा हो गया ,मै तो छोटा हो ठीक था ,तुम्हारे पास रहता था ,बड़े मजे आते थे ,| माँ  मुझे याद है जब तुम मुझे पढ़ाती थी तो मै बड़ा जल्दी सीख लेता था | अब तो पढाई में माँ  वो मजा नहीं रहा |  तुम्हारे हाथ के बनाये हुए पकवान खाने का जो मजा है वो यहाँ कही नहीं है |माँ तुम मेरी गलतियों पर डाटा नहीं पर  हमेशा एक अच्छा आदमी बनने को कहा  माँ मै एक अच्छा आदमी बनने के पहले आपका अच्छा बेटा बनना  चाहता हू |  ........ ....... ..माँ  तुमको  माँ दिवस मुबारक हो   ||